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गुर्जर आरक्षण आंदोलन का असर, करोड़ रुपए का नुकसान

मलारना डूंगर (सवाईमाधोपुर)। राजस्थान में आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 4 दिनों से गुर्जर का आंदोलन चल रहा है। आज आंदोलन के चौथे दिन गुर्जरों को धरना-प्रदर्शन रेलवे के साथ ही अब सड़कों तक भी पहुंच चुका है। ऐसे में ट्रेनों के साथ ही अब सड़क मार्ग भी बाधित हो गया है। दूसरी ओर, आंदोलन के चलते बाधित हुए रेल मार्ग के कारण कई रेलवे मार्गों को डायवर्ट किया गया है और कई ट्रेनों को रद्द किया जा चुका है। इसके साथ ही कई ट्रेनों को आने वाले दिनों के लिए भी रद्द किया गया है।

ऐसे में रेलवे को अब तक 4 दिनों में करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। राजस्थान में चल रहे गुर्जर आंदोलन को चार दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक इस मसले का कोई सार्थक हल नहीं निकल पाया है। हालांकि सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर वार्ता के लिए पहल भी की गई, जिसके चलते मंत्री विश्वेंद्र सिंह और आईएएस नीरज के पवन धरनास्थल पर पहुंचे और सरकार की ओर से गुर्जरों को वार्ता का न्यौता भी दिया। इसके बावजूद गुर्जरों की ओर से वार्ता के लिए धरनास्थल के अतिरिक्त कहीं ओर जाने से इन्कार कर दिया गया। ऐसे में आंदोलन को लेकर सरकार के प्रयास अभी भी जारी है और जारी है अभी तक भी आंदोलन के चलते रेलवे और सड़क मार्ग पर आवागमन।

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आंदोलन को लेकर रेलवे प्रशासन भी अलर्ट है और इसके चलते रेलवे प्रशासन ने कई ट्रेनों के रूटों को डायवर्ट किया है, वहीं कई ट्रेनों को रद्द भी किया है। इसके साथ ही रेलवे ने आने वाले कुछ दिनों के लिए भी कई ट्रेनों को रद्द किया है। ऐसे में जहां इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को आवागमन में परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है, वहीं रेलवे प्रशासन को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, रेलवे प्रशासन को आंदोलन के चलते अब तक 4 दिनों में करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

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गौरतलब है कि आंदोलन के चलते दिल्ली-मुंबई के बीच करीब 120 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित हुई हैं, जिनका मलारना स्टेशन पर 14 ट्रेनों का ठहराव है। यहां 8 फरवरी की शाम साढ़े 4 बजे से ट्रेनों का संचालन बंद है। यहां 8 फरवरी को दोपहर 3:52 पर अंतिम यात्री गाड़ी जयपुर-बयाना पैसेंजर का ठहराव हुआ था और मलारना से अंतिम मालगाड़ी 4 बजकर 16 मिनट पर गुजरी थी। 4 बजकर 52 बजे स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल रूम को पटरियों पर आंदोलन शुरू होने की पहली सूचना दी थी। मलारना स्टेशन के पास ट्रैक पर बैठे गुर्जर आंदोलनकारियो को गुर्जर समाज की ओर से हर तरह की रसद सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें भी आसपास के दर्जनों गांवों की ओर से दूध और छाछ की व्यवस्था की जा रही है। सुबह शाम करीब 2000 से अधिक लोगों के लिए सैकड़ों लीटर दूध आंदोलन स्थल पर भेजा जा रहा है। इस क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक गुर्जर ही हैं, ऐसे में दूध उत्पादकों ने दूध की सप्लाई को बाजार से पूरी तरह रोक दिया है।

ट्रेन और बसों का संचालन बंद होने से 4 दिन में ही दूध के साथ ही सब्जियों और फलों की कमी होने लगी। मलारना स्टेशन के पास बसे मलारना डूंगर, श्योमली, पोथाली, पिलवा, बिलोली, गोखरू, मकसुदनपुरा, चौहनपुरा, सांकड़ा सहित दर्जनों गांवों में निरंतर आने वाली सब्जियों की आवक रुक सी गई है। बाज़ारों में न तो ग्राहक नजऱ आ रहे हैं और न ही रसद सामग्री ही। गुर्जर आंदोलन से जहां पूरे प्रदेश की आम जनता प्रभावित हो रही है, वहीं इससे अछूते मलारना डूंगर के आस-पास के गांव भी नहीं रहे हैं।(PB)