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500 नागा संन्यासियों को मिली दीक्षा, किया 14 पीढिय़ों का पिंडदान

वर्षों की कठिन परीक्षा के बाद निरंजनी अखाड़े में करीब 500 नागा संन्यासियों ने सनातन सेना का हिस्सा बनने की परीक्षा पास कर ली। सोमवार को इन नागा संन्यासियों ने मुंडन करवाने के बाद अपना और 14 पीढिय़ों का पिंडदान किया। विजयाहवन के बाद इन संन्यासियों को दीक्षा दी जाएगी। मौनी अमावस्या तक इन संन्यासियों को अलग-अलग तरह के संस्कारों से गुजरने के बाद जीवन के पहले शाही स्नान में शामिल होने का मौका मिलेगा।

इसके बाद सभी नागा संन्यासी आजीवन निरंजनी अखाड़े के सदस्य रहेंगे। इस कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव भी शामिल हुए। उन्होंने निरंजनी के श्रीमहंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि के साथ ही नागा संन्यासियों को योग भी करवाया।
500 नागा संन्यासियों को मिली दीक्षा सनातन धर्म के सबसे बड़े अखाड़े जूना में रविवार को हुई दीक्षा के बाद सोमवार को निरंजनी अखाड़े में करीब पांच सौ नागा संन्यासियों की दीक्षा की शुरुआत हुई। नागा संन्यासियों को जोडऩे के लिए प्रक्रिया काफी पहले शुरू हुई थी। जिसमें ऐसे संन्यासियों को शामिल किया गया जो अपने गुरुओं की परीक्षा में पास हुए।
पहले संस्कार की पूरी करवाई गई परंपरा


कुंभ मेला क्षेत्र स्थित निरंजनी अखाड़े के शिविर में सुबह नए नागा संन्यासी बनाने से पहले संस्कार की परंपरा पूरी करवाई गई। पूर्व में संन्यास धारण किए संतों को पूरे विधि-विधान से अखाड़ों की परंपरा के मुताबिक, मुंडन संस्कार करवाया गया। इसके बाद संगम पिंडदान कराया गया। यह संत कई वर्षों तक अपने गुरु के साथ रहने के बाद संस्कार और दीक्षा के बाद नागा बनेंगे।

गृहस्थ जीवन में लौटे तो भी नए नाम से होगी पहचान
निरंजनी के श्रीमहंत और मेला प्रभारी रवीन्द्र पुरी ने बताया कि नागा संन्यासियों को मौनी अमावस्या तक कई संस्कारों से गुजरना होगा। नागा बनने के बाद भी यदि कोई संन्यासी गृहस्थ जीवन में लौटता है तो उसकी पीढिय़ों को अखाड़े से मिले नाम से ही जाना जाएगा। यानि यदि किसी को नाम के साथ गिरि या पुरी टाइटल मिला तो उसके संन्यास छोडऩे के बाद भी उसके बच्चों ही नहीं आगे आने वाली कई पीढिय़ों को गिरि या पुरी के टाइटल से जाना जाएगा।

निरंजनी के श्रीमहंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि ने बताया कि, करीब पांच सौ नागा संन्यासियों की दीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई है। मुंडन और पिंडदान के बाद रात में विजयाहवन संस्कार होगा। इसके बाद तीन चरण की प्रक्रिया से गुजरते हुए मौनी अमावस्या को इन संन्यासियों का पहला शाही स्नान होगा।

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