एसकेआरएयू : एक मंच पर बैठ किसानों, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने सांझा किए अनुभव

OmExpress News / Bikaner / स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को किसान, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी एक मंच पर बैठे और अपने-अपने अनुभव सांझा किए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वित्तीय सहयोग से राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत कृषि महाविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जैविक प्रमुख रतनलाल डागा थे। उन्होंने कहा कि जब किसान-वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी एक मंच पर बैठेंगे तो कृषि की दिशा बदल जाएगी। विद्यार्थियों को किसानों एवं वैज्ञानिकों के अनुभवों से सीखने के अवसर मिलेंगे। Bikaner News

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के साथ किसानों के खेतों में भी प्रयोग करने चाहिए। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया तथा कहा कि ऐसे प्रयास हों कि जैविक उत्पाद घर-घर पहुंचे। वरिष्ठ कृषि पत्रकार महेन्द्र मधुप ने कहा कि किसान सही मायनों में ‘खेतों के वैज्ञानिक’ हैं। अनेक किसानों ने उत्पादन एवं आय वृद्धि में कीर्तिमान स्थापित किए हैं तथा दूसरों के लिए मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से किसानों के संघर्ष एवं अनुंसधान की जानकारी विद्यार्थियों को मिलेगी।

उन्होंने ‘मिशन वैज्ञानिक किसान’ की जानकारी दी।कुलपति प्रो. बी. आर. छीपा ने कहा कि सम्मेलन में शिरकत करने वाले समस्त प्रयोगधर्मी किसान, मिट्टी से जुड़े हुए हैं। इन्होंने खेती में आमूलचूल परिवर्तन लाने के निश्चय के साथ कार्य किया तथा अपनी अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार तीनों श्रेणियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। Bikaner News

अधिष्ठाता एवं परियोजना प्रमुख आई.पी. सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत भविष्य में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. नरेन्द्र पारीक ने किया। उन्होंने आगंतुकों का आभार जताया। इस अवसर पर प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. एस. के. शर्मा, डाॅ. इंद्रमोहन वर्मा सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी मौजूद थे।  Bikaner News

इन किसानों ने निभाई भागीदारी

कार्यक्रम में 21 नए कृषि उपकरण इजाद करने वाले श्रीगंगानगर के गुरमेल सिंह घौंसी, गैसीफायर के पारम्परिक डिजायन में बदलाव करने वाले हनुमानगढ़ के रायसिह दहिया, आबू सौंफ विकसित करने वाले सिरोही के इशाक अली, मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण करने वाले सीकर के मोटाराम शर्मा, खरपतवार हटाने, खड़े प्याज के पत्ते काटने तथा प्याज खुदाई यंत्र विकसित करने वाले सीकर के श्रवण कुमार बाजिया, गाजर की दुर्गा-4 किस्म विकसित करने वाले जोधपुर के मदन लाल देवड़ा, फूलगोभी की अजीतगढ़ सलेक्शन विकसित करने वाले सीकर के जगदीश पारीक ने भागीदारी निभाई।

इसी प्रकार मिर्ची ग्रेडिंग, गाजर धुलाई, लोरिंग मशीन इजाद करने वाले जोधपुर के अरविंद साखला, देशी बैंगन एवं बेल वाली सब्जियों में नवाचार करने वाले जयपुर के गंगाराम, जैविक खेती में नवाचार करने वाले जयपुर के गजांनद अग्रवाल, जैविक विधि से अनार की खेती करने वाले सीकर के रामकरण एवं संतोष, जैविक खेती में नवाचार करने वाले जोाधुपर के पवन के टाक एवं राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सदस्य राकेश चैधरी ने अपने-अपने अनुभव सांझा किए।

एमजीएसयू मुख्य परीक्षा 01 फरवरी से प्रारम्भ, प्रायोगिक परीक्षा 03 जनवरी से – Bikaner News

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के स्नातक स्तर कला प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के स्वयंपाठी परीक्षार्थियों की मुख्य परीक्षा 01 फरवरी, 2019 से तथा कला संकाय सहित सभी स्नातक पाठ्यक्रमों (विधि प्रथम वर्ष एवं शिक्षा पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त) नियमित परीक्षार्थियों की परीक्षाएं दिनांक 11 फरवरी, 2019 से प्रारम्भ होगी। छात्रों की अत्याधिक संख्या होने के कारण विश्वविद्यालय द्वारा इस वर्ष स्नातक कला द्वितीय वर्ष में हिन्दी साहित्य, भूगोल, राजनीति विज्ञान एवं इतिहास विषयों के स्वयंपाठी छात्रों की परीक्षाएं प्रथम वर्ष की भांति पृथक से कराई जा रही है।  Bikaner News

परीक्षा नियंत्रक डॉ. जे.एस. खीचड़ ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव-2019 को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा 30 मार्च तक मुख्य परीक्षा 2019 सम्पन्न कराने की योजना है । इसी क्रम में प्रायोगिक परीक्षाएं भी 03 जनवरी, 2019 से प्रारम्भ करने का कार्यक्रम है। प्रायोगिक एवं मुख्य परीक्षा 2019 के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। परीक्षा 2019 हेतु अभी तक 3.82 लाख परीक्षा आवेदन पत्र भरे जा चुके है। वर्तमान में विधि एवं बी.एड./एम.एड. पाठ्यक्रमों हेतु 100 रू. विलम्ब शुल्क सहित परीक्षा फार्म भरे जा रहे है जिसकी अंतिम तिथि 17 दिसम्बर है। दुगुने शुल्क सहित 23 दिसम्बरतक आवेदन भरे जा सकते है।

तैस्सितोरी जयंती पर म्यूजियम परिसर में मूर्ति पर पुष्पांजली – Bikaner News

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के शोध अध्ययेता इटली विद्वान डाॅ. एल. पी. तैस्सितोरी की 131 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा राजकीय संग्रहालय परिसर में तैस्सितोरी की प्रतिमा स्थल पर राजस्थानी भाषा साहित्य के पथ प्रदर्शक तैस्सितोरी के कार्यो की उपादेयता पर चर्चा का आयोजन किया गया। Bikaner News

कार्यक्रम में हिन्दी राजस्थानी के साहित्यकारों ने तैस्सितोरी की प्रतिमा पर पुष्पाजलि अर्पित की कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. मदन सैनी ने कहा कि डा. एल. पी. तैस्सितोरी ने इटली से आकर यहां राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के शोध का कार्य किया, हमें अपनी मायड भाषा पर गर्व होना चाहिये। उन्होंने कहा कि राजस्थानी को संविधान की 8 वीं अनुसुची में मान्यता मिलते ही इसका ज्यादा विस्तार होगा।

उन्होने कहा कि राजस्थानी के साहित्यकार डाॅ. तैस्सितोरी ने अपने देश में रहते हुए ही राजस्थानी भाषा को प-सजय़ना व लिखना सीखा। उसी समय से उनकी भारत आकर यहां की भाषाओं ( विशेष रूप से राजस्थानी ) का भलीभांति अध्ययन करने की इच्छा जाग्रत हुई। उन्होंने अपनी एक कृति की प्रस्तावना में यही लिखा है कि ‘‘मेरी प्रबल अभिलाषा सदैव रही है कि ( भारत की ) जिन भाषाओं को मैं इतना प्यार करता हूं उनका अध्ययन उसी जगह जाकर करूं। यह अभाव केवल अवसर का ही है, जो कभी न कभी मु-हजये अवश्य मिलेगा।” Bikaner News

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद्-ंउचयसाहित्यकार ओम प्रकाश सारस्वत ने कहा कि डाॅ. एल. पी. तैस्सितोरी ने 5 वर्ष तक इस क्षेत्र्ा में खोज की उसकी सर्वे रिपोर्ट अभिलेखागार में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि तैस्सितोरी ने राजस्थानी गीत भी लिखे। सारस्वत ने कहा कि यहां आने के बाद यहां की लोकसंस्कृति व लोकपरम्परा से प्रभावित होकर ही उन्होंने राजस्थान के इतिहास को लेखनीबद्ध किया। Bikaner News

निःसन्देह, एक विदेशी का यहां आने के बाद में यहां के इतिहास का भलीभांति अध्ययन व अनुशीलन करके लिपिबद्ध करना श्रमसाध्य कार्य है, लेकिन यदि तुलनात्मक अध्ययन करें तो हमें यह ज्ञात होता है कि कर्नल टाॅड द्वारा किए गए कार्य से डाॅ. तैस्सितोरी द्वारा किया गया कार्य अधिक उपयोगी व महत्वपूर्ण था । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सरवा संगम के अध्यक्ष एन. डी. रंगा ने कहा कि डाॅ. तैस्सितोरी ने पश्चिम राजस्थान में शोध कार्य किया, उसके प्र्रमाण पाकिस्तान के पुस्तकालयों में भी मिलते है।

आरंभ में कार्यक्रम के संयोजक एवं कवि-ंउचयकहानीकार राजेन्द्र जोशी ने सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की गतिविधियों का विस्तार से परिचय देते हुए वर्तमान एवं भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तैस्सितोरी लेखांे में सबसे महत्वपूर्ण है ‘पश्चिमी पुरानी राजस्थानी का व्याकरण‘ जो इण्डियन एण्टीक्वेरी में प्रकाशित हुआ था। वस्तुतः राजस्थानी भाषा को सुसंगठित करके व्याकरण सहित प्रस्तुत करने का यह उन्हीं का प्रथम और महत्वपूर्ण प्रयास था। इससे पूर्व इस प्राचीन साहित्य की विशिष्टता व विशालता को शायद ही किसी ने अनुभूत किया होगा।

रामचरितमानस, महाभारत, परमज्योति स्तोत्र्ा, टू जैन वर्जन्स आॅफ द स्टोरी आॅॅफ सोलोमन्स जजमेन्ट आदि पर भी उनके लेख छपे। कार्यक्रम के प्रारंभ मंे कवि-ंउचयकथाकार राजाराम स्वर्णकार ने स्वागत करते हुए डाॅ. तैस्सितोरी के व्यक्तित्व और कृतित्तव पर विस्तार से प्रकाश डाला । कवि चन्द्रशेखर जोशी ने कहा कि डाॅ. तैस्सितोरी ने स्वदेश में रहते हुए ही अंग्रेजी, ग्रीक, लैटिन के साथ संस्कृति व प्राकृत भाषा भी सीखी। Bikaner News

जोशी ने कहा कि उन्होने पुरानी व नई गुजराती, अपभं्रश, मारवाड़ी, डिंगल, ब्रज, उर्दू आदि कई और भारतीय भाषाओं का ज्ञानार्जन किया। कार्यक्रम में चैनई निवास जमनादास सेवग कहा कि उन्होने जैन ग्रन्थों का इटली की भाषा में अनुवाद किया। समारोह में विचार व्यक्त करते हुए साहित्यकार जानकीनारायण श्रीमाली ने कहा कि भाषा के प्रति उनकी सदासयता अनुकरणीय रही है, श्रीमाली ने कहा कि डाॅ. तैस्सितौरी ने बिना किसी शिक्षक की सहायता के अनेक भाषाओं को सीखा ।

कार्यक्रम में चित्र्ाकार योगेन्द्र पुरोहित, मुक्ति संस्था के बृजगोपाल जोशी, शिक्षाविद् भगवानदास पडिहार, नागेश्वर जोशी, ऋषिकुमार अग्रवाल, डाॅ.एम.एल.व्यास, जुगलकिशोर पुरोहित, रामेश्वर बाडमेरा, नृसिंह भाटी ‘नीशु’, जनमजये व्यास, श्री मोईनूदीन कोहरी, श्री महेन्द्र बरडिया, पी.सी. राखेचा, पुखराज सुराणा (मुंबई), सहित अनेक लोगो ने पु-ुनवजयपाजंलि की। अंत में संगीत-हजय डाॅ. मुरारी शर्मा ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया ।

डाॅ. अभिलाषा दाधीच भुबनेश्वर में भारत विकास अवार्ड से सम्मानित

पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के पशु व्याधिकी विभाग की स्नातकोŸार छात्रा डाॅ. अभिलाषा दाधीच को इंस्टिट्यूट आॅफ सेल्फ रिलायंस द्वारा भुबनेश्वर में 1-2 दिसम्बर, 2018 को आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भारत विकास अवार्ड से सम्मानित किया गया है। डाॅ. अभिलाषा को यह अवार्ड उनके शोध पत्र के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि डाॅ. अभिलाषा पूर्व में मलेशिया तथा मोरक्को में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों में भी पत्र वाचन कर चुकी है तथा उन्हे इनके लिए फेलोशिप भी प्रदान की गयी थी।