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कोलकाता : प्रवासी राजस्थानी समाज में संगीत प्रेम की अलख जगाने वाले लालजी नहीं रहे

सच्चिदानंद पारीक

कोलकाता. प्रवासी राजस्थानी समाज(MigratoryRajasthani Society) के बड़े वर्ग में, खासतौर पर संगीत प्रेमियों में लालजी के नाम से लोकप्रिय, श्रीलाल लाहोटी का देहावसान हो गया. गुरुवार रात, नीमतल्ला महाशमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. समाजिक- सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था गोठ के प्रणेता, संजय बिन्नाणी ने उनके बारे में बताया कि वे बहुत अच्छे अकॉर्डियन वादक थे.

गुरुवार को नीमतल्ला शमशान घाट में हुई अंत्येष्टि

आचार्य पं. दामोदर मिश्र से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की भी तालीम ली थी.माहेश्वरी संगीतालय उनकी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा. गोपाल कृष्ण तिवाड़ी के साथ उनकी जुगलबंदी विशेष रूप से चर्चित रही है.लोकभाषा में, तिवाड़ी के रचे कई गीतों को लालजी ने संगीतबद्ध किया था.उनकी धुनों ने ही उन्हें समाज में लोकप्रिय बनाया. पद्मचंद जैन और रमेश गोयनका के साथ मिलकर, लालजी-गोपालजी ने जैन समाज में भी संगीत प्रेमियों को तैयार किया. आजीवन, वे पारखकोठी गवरजा माता की सेवा में अपने गीत और संगीत अर्पित करते रहे.वे माहेश्वरी संगीतालय के मंत्री व अध्यक्ष रहे .माहेश्वरी सभा के मंत्री होने के साथ-साथ उन्होंने कई संस्थाओं में समाज का प्रतिनिधित्व किया. उनका निधन, समाज की एक अपूरणीय क्षति है.गोठ परिवार उनके निधन से मर्माहत है.हम नटराज महेश्वर से उनकी जीवात्मा को चरण-शरण देने की तथा परिवार को इस असहनीय दु:ख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं.