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बिना गुरु के ब्रह्म को जानना मुश्किल – पं. जयप्रकाश

बीकानेर। बाबा रामदेव जी की अमृतमय कथा प्रवक्ता श्रद्धेय जयप्रकाश महाराज ने कहा कि बिना गुरु के ब्रह्म को जानना मुश्किल हैं। उक्त प्रवचन भीनासर स्थित बंशीलाल राठी की बगेची स्थित मुरली मनोहर मैदान में आयोजित महायोगी अवधूत संत श्री पूर्णानन्द महाराज की 52वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित बाबा रामदेव की ‘संगीतमय अमृतकथा महोत्सव’ का शुभारम्भ करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग के आचार्य भगवान शंकर हैं और बिना गुरु और बिना भक्ति के ब्रह्म को जानना मुश्किल हैं। और जब तक नहीं जानेंगे तब तक प्रीति नहीं होगी और जब तक प्रीति (प्रेम) नहीं होगी तब तक सत्संग में मन नहीं लगेगा। इस प्रसंग में भगवान शंकर पार्वती जी से कहते हैं –

जाने बिनु न होई परतिति। बिनु परतिति होई नहि प्रीति।।

लोक देवता बाबा श्री रामदेव जी के महात्तमय की कथा का श्रवण करते हुए श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा में महाराज श्री ने “पिछम धरा सू म्हारा बाप जी पधारिया”, “खम्मा-खम्मा हो रुणीचा रा धणिया” के भजन भी सुनाएं। इससे पूर्व प्रात: यज्ञाचार्य पं. अशोक ओझा के सानिध्य में 11 कुण्डीय यज्ञ का शुभारम्भ अरणी मंथन व पूजन के साथ हुआ। दोपहर कथा आरम्भ से पूर्व श्री पूर्णेश्वर महादेव मंदिर में महाआरती हुई तथा रामनारायण राठी द्वारा दीप प्रज्जवलन किया गया। कथा का आरम्भ नारायण बाहेती द्वारा गणेश वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन गोकुल सारड़ा ने किया। इस अवसर पर जमनादास सारड़ा, सूरज प्रकाश जी ने माल्यार्पण कर महाराज का स्वागत किया।

भीनासर से लगाव- कथा प्रवक्ता श्रद्धेय जयप्रकाशजी का बीकानेर एवं भीनासर से लगाव है और कथा का वाचन राजस्थानी व मारवाड़ी में करते हुए कहा कि उनके पूर्वज भीनासर मूल के ही हंै। हालांकि मेरी शिक्षा व बचपन कोलकाता में बीता है पर मुझे मेरी धरती से लगाव है यह बताते हुए भावुक हो गए। कथा के अवसर पर उनके पूज्य पिता जी भी साथ आए हैं उनका भी कथा पंडाल में स्वागत किया गया।