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मंत्रियों को देना होगा अपनी-अपनी संपति का ब्यौरा

जयपुर। पिछली राजे सरकार के 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान किसी भी मंत्री ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया और अब इसी कसौटी पर गहलोत सरकार के मंत्रियों की परख है। हालांकि नई सरकार के 24 मंत्रियों को पहले साल की सूचना 31 अगस्त तक देनी है लेकिन उनके समय पर सूचना देने या न देने से उनकी जवाबदेही व पारदर्शिता वाली सरकार की मंशा और सोच उजागर होगी।

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केन्द्र सरकार ने 2010 में सभी केन्द्रीय और राज्यों के मंत्रियों को अपनी सम्पत्ति की जानकारी हर वर्ष 31 अगस्त तक ब्यौरा देने के निर्देश दिए थे, और ऐसा न करना जवाबदेही व पारदर्शिता अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है। वहीं पिछली सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन अपने पूरे कार्यकाल के दौरान पूर्व मंत्री अपनी इस अहम जिम्मेदारी से पीछे हटते रहे। इस बारे में लगातार खबरें प्रसारित होने के बाद भी किसी भी मंत्री की संपत्ति का ब्यौरा कैबिनेट सचिवालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इसे लेकर कैबिनेट सचिवालय ने बार बार रिमाइंडर भी जारी किए हैं जिसके बाद भी लगातार 4 सालों तक हर साल किसी भी पूर्व मंत्री ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। कुछ पूर्व मंत्रियों ने किसी किसी साल का ब्योरा दिया है इसमें भी इन पूर्व मंत्रियों ने किसी भी साल ब्योरा नहीं दिया है।
किसी भी वर्ष ब्यौरा न देनेवाले पिछली सरकार के या पूर्वकैबिनेट मंत्री 1.नंदलाल मीणा पूर्व टीएडी मंत्री, राजपाल सिंह शेखावत पूर्व उद्योग मंत्री, अजय सिंह किलक पूर्व सहकारिता मंत्री पूर्व राज्यमंत्रियों में अमराराम का नाम शामिल है। कुछ पूर्व मंत्रियों ने किसी किसी साल हालांकि कैबिनेट सचिवालय को ब्योरा भिजवाया तो है लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने से ये ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

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कैबिनेट सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक पिछली राजे सरकार के तत्कालीन 13 कैबिनेट मंत्री, 5 तत्कालीन स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों और 6 तत्कालीन राज्यमंत्री किसी न किसी वर्ष ब्योरा दे चुके हैं लेकिन इन्होंने अभी अपूर्ण सूचनाएं मुहैया कराई हैं और इसलिए इनका भी पूरा ब्यौरा उपलब्ध नहीं हैं।
तत्कालीन कैबिनेट मंत्री-गुलाब चंद कटारिया,राजेन्द्र सिंह राठौड़, कालीचरण सराफ, प्रभुलाल सैनी, गजेन्द्र सिंह खींवसर, युनूस खान, सुरेन्द्र गोयल, डॉ. रामप्रताप, हेमसिंह भड़ाना, बाबूलाल वर्मा, अरूण चतुर्वेदी, श्रीचंद कृपलानी, जसवंत सिंह यादव
तत्कालीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)- कृष्णेन्द्र कौर दीपा, वासुदेव देवनानी, राजकुमार रिणवा, अनिता भदेल, सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी।
-तत्कालीन राज्य मंत्री -ओटाराम देवासी, पुष्पेन्द्र सिंह, धनसिंह रावत, बंशीधर, सुशील कटारा, कमसा ।
अब इस सरकार के गठन में अभी डेढ़ माह ही हुआ है लेकिन सरकार के तमाम 24 मंत्रियों को 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा।
क्या देनी होती है जानकारी-किसी भी मंत्री को अपने परिवार के सदस्यों की परिसम्पत्तियों, देयताओं और व्यापारिक हितों की जानकारी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को देनी होती है। इस ब्यौरे में सभी अचल सम्पत्ति, शेयर-डिबेंचर, नकदी, आभूषण की कुल अनुमानित कीमत बतानी होती है। मंत्री बनने के बाद उसे और उसकी पत्नी को व्यापार और कार्यों के प्रबंधन-स्वामित्व छोडऩे की जानकारी शामिल होती है। मंत्रियों की आचार संहिता के मुताबिक यदि उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया तो मुख्यमंत्री उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।

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