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नारायण सेवा संस्थान के सम्मान में डाक विभाग ने जारी किया डाक टिकट

उदयपुर। भारतीय डाक विभाग ने आज उदयपुर के गैर-लाभकारी संगठन नारायण सेवा संस्थान के सम्मान में डाक टिकट जारी किया। उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान के बडी परिसर में आयोजित एक समारोह में अजमेर मंडल के पोस्ट मास्टर जनरल श्री रामभरोसा जी, उदयपुर डाकघर मंडल के प्रवर अधीक्षक श्री जी एस गुर्जर और नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष , श्री कैलाश अग्रवाल की उपस्थिति में टिकटों का अनावरण किया गया।श्री रामभारोसा जी, पोस्ट मास्टर जनरल, अजमेर डिवीजऩ ने नारायण सेवा संस्थान के बड़ी परिसर में एक नए डाकघर के उद्घाटन की भी घोषणा की, जिसका प्रबंधन पास के थूर गांव के हेड पोस्ट मास्टर द्वारा किया जाएगा।
पांच रुपए मूल्य वाले इस डाक टिकट में उज्ज्वल रंगों में नारायण सेवा संस्थान का आधिकारिक लोगो शामिल है। साथ ही इसमें संस्थान के उदयपुर स्थित पोलियो अस्पताल की तस्वीर को भी स्थान दिया गया है। इस डाक टिकट का जारी होना दिव्यांग और वंचित लोगों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य करने के लिहाज से संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है।


डाक टिकट जारी करने के अवसर पर आयोजित समारोह में नारायण सेवा संस्थान नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष , श्री कैलाश अग्रवाल ने कहा, ”नारायण सेवा संस्थान के लिए यह गर्व का पल है, जब भारतीय डाक विभाग ने संस्थान पर डाक टिकट जारी करते हुए हमें सम्मानित किया है। हमें खुशी है कि समाज के कमजोर वर्ग के सुधार की दिशा में हमारी कड़ी मेहनत और समर्पण को भारतीय डाक विभाग ने पहचाना और उसे मान्यता दी है। हम भारतीय डाक विभाग के अधिकारियों को हमारे प्रति भरोसा जताने और हमें यह सम्मान देने के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं, निश्चित तौर पर यह संगठन के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट के समान है। नारायण सेवा संस्थान ने हाल ही अपने कैंपस को स्मार्ट विलेज कैंपस घोषित किया है, जहां 1100 शैयाओं वाले अस्पताल की सुविधा है। साथ ही, परिसर के भीतर ही बैंक और एटीएम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। आसपास के इलाकों के आदिवासी बच्चों को अवसर प्रदान करने के लिए संस्थान ने यहां एक प्राथमिक विद्यालय भी शुरू किया है, जिसमें डिजिटल क्लासरूम की सुविधा है। नारायण सेवा संस्थान ने आवागमन की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक अच्छी तरह से समन्वित परिवहन व्यवस्था शुरू की है। नारायण सेवा संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली अन्य सुविधाओं में प्रमुख हैं- अनाथ लोगों के लिए आश्रय, मरीजों के लिए चैरिटी, दिव्यांग लोगों का सहयोग, प्रतिभाशाली लोगों को पोषित करना और उन्हें परफॉर्म करने का अवसर देना, मनोरंजन, शॉपिंग और हर समय पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना।


नारायण सेवा संस्थान के बारे में नारायण सेवा संस्थान दुनिया के विशेष रूप से सक्षम और वंचित लोगों के लिए एक बेहतरीन स्थान है। पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ अग्रवाल द्वारा 1985 में स्थापित नारायण सेवा संस्थान एक धर्मार्थ संगठन है जो दिव्यांग लोगों के समुदाय को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा लाने के लिए सेवा प्रदान करता है। झीलों की नगरी उदयपुर के पास बडी गांव में स्थित नारायण सेवा संस्थान प्रकृति की गोद में अरावली पहाडिय़ों की सीमा से घिरा हुआ है। नारायण सेवा संस्थान ‘दिव्यांग लोगों के लिए एक ऐसा स्मार्ट कैंपस’ है, जहां ‘जीवन के किसी भी स्तर पर, किसी भी तरह से वंचित अनुभव करने वाले लोगों के लिए’ सभी सुविधाएं जुटाई गई हैं। संस्थान भारत में अपनी 480 शाखाओं और विदेशों में 86 शाखाओं के साथ विकलांगता को कम करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए काम करता है। प्रतिदिन एक निशुल्क वाहन उदयपुर रेलवे स्टेशन पर मरीजों और उनके परिवारों को लेने के लिए पहुंचता है और इसके बाद गेस्ट हाउस में उनके लिए मुफ्त आवास और भोजन की व्यवस्था की जाती है। नारायण सेवा संस्थान भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, यूक्रेन, ब्रिटेन और यूएसए में रहने वाले और पोलियो और सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त शारीरिक रूप से विकलांग रोगियों और अन्य जन्म विकलांगता से पीडि़त लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा है। नारायण सेवा संस्थान ने पिछले 30 वर्षों में 3.5 लाख से ज्यादा मरीजों का ऑपरेशन किया है और और उन्हें चिकित्सा सेवाओं, दवाइयों और प्रौद्योगिकी का निशुल्क लाभ देकर पूर्ण सामाजिक-आर्थिक सहायता प्रदान की है। किसी भी प्रकार के शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए नारायण सेवा संस्थान आने वाले मरीजों को यहां किसी भी नकद काउंटर या भुगतान गेटवे से गुजरना नहीं होता। संस्थान में 1100 बिस्तरों वाले अस्पताल हैं जहां 125 डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की एक टीम प्रतिदिन लगभग 95 रोगियों का ऑपरेशन करते हुए मानवता की सेवा में जुटी है।(PB)