Bikaner Rajasthan शख्सियत

गुरुकृपा चूर्ण के जनक स्व. नागल ने किया था असाध्य रोगों का इलाज

लोगों की शुगर (डायबिटीज) के साथ हृदयरोग, केलोस्ट्रोल, गठिया और पाचन शक्ति जैसे गंभीर रोगों से मुक्ति दिलाने में जिस महापुरुष का अहम् योगदान रहा, अब वह हमारे बीच नहीं रहे हैं। ‘पहला सुख-निरोगी काया’ की बात कहने वाले स्व. लक्ष्मीनारायण नागल ने शूगर जो कि लोगों में खौफ के रूप में कायम था उसको जड़ से मुक्त करने की ठान रखी थी।

गुरु श्रीश्री १००८ श्री शंकरनाथ जी महाराज नवलेश्वर मठ, बीकानेर के आशीर्वाद से और गुरुजी के सान्निध्य में रहकर व बीकानेर के जाने-माने वैद्यों के सहयोग से यह अद्भुत व चमत्कारी औषधि मानव सेवा के उपयोग हेतु तैयार की और गुरुजी के आशीर्वाद से आपने इसका नाम भी गुरु कृपा चूर्ण रखा। इस रोग को जड़ से मिटाने का बीड़ा उठाकर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर शुगर (डायबिटीज) के साथ हृदय रोग, केलोस्ट्रोल, गठिया जैसे रोगों से लोगों कर भ्रम दूर किया, साथ में इस रोग को ठीक किया जा सकता है, यह जन चेतना के द्वारा इस रोग की भ्रान्तिया व शंकाएं लोगों में पैदा थी उसको आपने अथक प्रयास से दूर की है। साथ में आप भारत के जाने-माने डॉक्टरों से मिले, उनसे इस रोग के बारे में चर्चा कर ज्ञान का आदान-प्रदान किया। आपके इस प्रयास को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सराहा गया है और आज गुरु कृपा चूर्ण का पूरे भारत में असंख्य लोग प्रयोग कर रहे है व इससे शुगर के रोगी आशातीत लाभ उठा रहे हैं।

श्री नागल का जन्म १९३६ में बीकानेर राजस्थान में हुआ। पेशे से लकड़ी के व्यापारी हैं और बाल्यकाल से धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं। बीकानेर की ऐतिहासिक परम्परा के मुताबिक आपने धर्म- कर्म और गुरु सेवा में अपने जीवन का समय लगाये रखा है। युवाकाल में अपने पिताजी के व्यापार को ऊंचाइयां दी। साथ ही सामाजिक, राजनीति और जन सेवा में भी अपने बढ़-चढ़ कर समय दिया है। आप बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के आजीवन सदस्य हैं और वर्तमान में बीकानेर टिम्बर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं।

आज बीकानेर की धरा ने ऐसे महापुरुष को खो दिया है जिसने नि:स्वार्थ भाव से लोगों की निरोग रहने के लिए जागरूक किया तथा जटिल बीमारियों के इलाज हेतु हमेशा तत्पर रहे। दिवंगत आत्मा को शत्-शत्-नमन।