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धन और ऐश्वर्य के लिए विधि विधान से करें लक्ष्मी गणेश की पूजा

मां लक्ष्मी के पूजन से घर में धन-धान्य बना रहता है.

दिवाली पांच पर्वों का अनूठा त्योहार है. इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और यमद्वितीया आदि मनाए जाते हैं. दिवाली की रात्रि में कई प्रकार के तंत्र-मंत्र से महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर पूरे साल के लिए सुख-समृद्धि और धन लाभ की कामना की जाती है. इस बार दिवाली 7 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी.
दिवाली पर पूजन के लिए सामग्री महालक्ष्मी पूजन में केसर, रोली, चावल, पान का पत्ता, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिन्दूर, सूखे मेवे, मिठाई, दही गंगाजल धूप, अगरबत्ती , दीपक रुई, कलावा, नारियल और कलश के लिए एक ताम्बे का पात्र.
कैसे करें दिवाली पर पूजन की तैयारी- एक थाल में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं या नवग्रह का यंत्र स्थापित करें. इसके साथ ही एक ताम्बे का कलश बनाएं, जिसमें गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपड़े से ढंक कर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें. जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया है, वहां पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी-गणेश सरस्वती जी या ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि देवी देवताओं की मूर्तियां या चित्र सजाएं. कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रृंगार करके फल-फूल आदि से सजाएं. इसके दाहिने ओर एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं, जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है. दिवाली के दिन की विशेषता लक्ष्मी जी के पूजन से संबन्धित है. इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में लक्ष्मी जी के पूजन के रूप में उनका स्वागत किया जाता है. दिवाली के दिन जहां गृहस्थ और व्यापारी वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि और धन की कामना करते हैं, वहीं साधु-संत और तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करने के लिए रात्रिकाल में अपने तांत्रिक कर्म करते हैं.


दीवाली पर पूजा का विधान-घर के बड़े-बुजुर्गों को या नित्य पूजा-पाठ करने वालों को महालक्ष्मी पूजन के लिए व्रत रखना चाहिए. घर के सभी सदस्यों को महालक्ष्मी पूजन के समय घर से बाहर नहीं जाना चाहिए. सदस्य स्नान करके पवित्र आसन पर बैठकर आचमन, प्राणायाम करके स्वस्ति वाचन करें. फिर गणेशजी का स्मरण कर अपने दाहिने हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, दव्य और जल आदि लेकर दीपावली महोत्सव के निमित्त गणेश, अम्बिका, महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली, कुबेर आदि देवी-देवताओं के पूजनार्थ संकल्प करें. कुबेर पूजन करना लाभकारी होता है. कुबेर पूजन करने के लिए सबसे पहले तिजोरी अथवा धन रखने के संदुक पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं, और कुबेर का आह्वान करें. सबसे पहले गणेश और अम्बिका का पूजन करें. इसके बाद कलश स्थापन, षोडशमातृका पूजन और नवग्रह पूजन करके महालक्ष्मी आदि देवी-देवताओं का पूजन करें. आप हाथ में अक्षत, पुष्प, जल और धन राशि ले लें. यह सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प करें. ‘मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान और समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त होÓ. सबसे पहले गणेश जी और गौरी का पूजन करें. हाथ में थोड़ा-सा जल ले लें और भगवान का ध्यान करते हुए पूजा सामग्री चढ़ाएं. हाथ में अक्षत और पुष्प लें. अंत में महालक्ष्मी जी की आरती के साथ पूजा का समापन करें. घर पूरा धन-धान्य और सुख-समृद्धि हो जाएगा. दिवाली का विधिवत-पूजन करने के बाद घी का दीपक जलाकर महालक्ष्मी जी की आरती की जाती है. आरती के लिए एक थाली में रोली से स्वास्तिक बनाएं. उस में कुछ अक्षत और पुष्प डालें, घी का चार मुखी दीपक जलाएं और मां लक्ष्मी की शंख, घंटी से आरती उतारें. आरती करते समय परिवार के सभी सदस्य एक साथ होने चाहिए. परिवार के प्रत्येक सदस्य को माता लक्ष्मी के सामने सात बार आरती घूमानी चाहिए. सात बार होने के बाद आरती की थाली को लाइन में खड़े परिवार के अगले सदस्य को दे देना चाहिए. यहीं क्रिया सभी सदस्यों को करनी चाहिए.


दिवाली एवं धनत्रयोदशी पर महालक्ष्मी के पूजन के साथ-साथ धनाध्यक्ष कुबेर का पूजन भी किया जाता है. कुबेर पूजन करने से घर में स्थायी सम्पत्ति में वृद्धि होती है और धन का अभाव दूर होता है.
दिवाली पर गणेश जी, कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसे में इस दिन धन और ऐश्वर्य के लिए दिवाली के दिन सर्वप्रथम पूज्यनीय गणेश जी, कुबेर और माता लक्ष्मी की विधिविधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दनि शुभ मुहुर्त में एक चौकी पर नया कपड़ा बछिाकर सर्वप्रथम पूज्यनीय गणेश जी और उनके दाहिने भाग में माता लक्ष्मी को स्थापित करना चाहिए। मान्यता है क िलक्ष्मी जी के साथ वष्णिु जी़ और सरस्वती जी की पूजा करने से मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती हैं।
लक्ष्मी पूजन की सामग्री दविाली पर लक्ष्मी पूजन में कमल गट्टे, पंचामृत, फल, बताशे, मिठाईयां, कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली व घी के दएि शामलि करना जरूरी होता है।
ऐसे शुरू करें पूजन शुभ मुहुर्त में होने वाली लक्ष्मी पूजा में सर्वप्रथम एक चौकी पर लाल या सफेद रंग का कपड़ा बछिाए। इसके बाद उस पर इन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापति कर उनके सामने एक कलश रखें। पूजा शुरू करते हुए मूर्तियों पर जल छडि़कें। इसके बाद रोली, कलावा, हल्दी आद िचढाएं। इसके अलावा उपरोक्त पूजन सामग्री से मां की पूजा करने के बाद मिठाई व चरणामृत से भोग लगाएं व वधिवित आरती करें।


पूजा में श्रीयंत्र रखें दिवाली पूजा में लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र और स्फटिक का श्रीयंत्र रखना शुभ होता है। पूजन के दौरान मां लक्ष्मी जी के सामने घी के दएि जलाना अनविार्य होता है। पूजन के अंत में गणेश जी, कुबेर जी, वष्णिु जी, सरस्वती जी व माता लक्ष्मी से क्षमा मांगे। इससे सभी देवी-देवता खुश होते हैं। जीवन में वद्यिा, धन और ऐश्वर्य मलिता है। घर में खुशयिों का आगमन होने के साथ ही स्वास्थ्य लाभ होगा।
इन नामों का जप करें पूजा में इन नामों का जाप करने से मां लक्ष्मी जल्दी खुश होती हैं। आद्यलक्ष्म्यै नम:। विद्यालक्ष्म्यै नम:। सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:। अमृतलक्ष्म्यै नम:। कामलक्ष्म्यै नम:। सत्यलक्ष्म्यै नम:। भोगलक्ष्म्यै नम:। योगलक्ष्म्यै नम:।…ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतो पिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर:।।… श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:। (PB)